Posts

Basics of Database Part 01

Image
 What is Database? A database is a collection of information organized for easy access, management, and maintenance. Exp: Customer data          Product Inventory etc. Types of Data Models - Record-based logical model - Hierarchical Data Model - Network Data Model - Relational Data Model - Object-based logical model - Entity relationship model DBMS Operations - Adding new files - Inserting data - Retrieving data - Modifying data - Removing data - Removing files Advantages of DBMS - Sharing of data across applications - Enhanced security mechanism - Enforce integrity constraints - Better transaction support  - Backup and recovery features Introduction to RDBMS - A relational database refers to a database that stores data in a structured format, using rows and columns. - This makes it easier to locate and access specific values within the database. - It is "relational" because the values within each table are related to each other. tables may also be re...

लाउडस्पीकर

Image
  लाउडस्पीकर   आज कल ऐसी चीजे चर्चा का विषय बन गई है जिनके बारे में आमतौर में सोंचा नहीं जाता था।  अब ये तो लाउडस्पीकर ने भी नहीं सोंचा होगा की एक दिन उसके चर्चे पुरे भारतवर्ष में होंगे।  हो भी क्यों न काम जो ऐसा किया है।  भगवान् के लिए प्रार्थना, अल्लाह के लिए अज़ान ये सब तो मन के भीतर होनी चाहिए थी क्युकी भगवान्, अल्लाह ने तो कभी नहीं कहा न की जब तब ज़ोर ज़ोर से लाउडस्पीकर में मुझे नहीं याद करोगे मैं तुम्हारी नहीं सुनूंगा। भगवान् की की भक्ति तो मन से होती है न की चिल्ला कर।  इसे राजनैतिक स्वरुप देना उचित नहीं है।   मस्जिदों में मंदिरो में या अन्य देव स्थलों में तो इनसभी चीजों का उपयोग ही नहीं है, अगर इसका उपयोग परिसर में भजन इत्यादि के लिए करते है तो ये सुनिश्चित करना चाहिए की उसकी आवाज़ परिसर के बाहर न जाये क्युकी हो सकता है कोई विद्यार्थी अध्ययन कर रहा हो, किसी अस्वस्थ व्यक्ति को तेज़ आवाज़ से परेशानी हो रही हो और ईश्वर, अल्लाह तो ये कभी नहीं चाहेंगे की उनकी प्रार्थना किसी को कष्ट देकर हो।   आज के सोशल मीडिया के वक़्त में व्यक्ति को नई चीजे...

दुनिया के अजीब रंग

Image
 दुनिया के अजीब रंग  दुनिया कितनी बदल गई है इस बात से तो सभी परिचित है लेकिन समझना नहीं चाहता कोई।  इंसान का व्यवहार तौर तरीका सबमे बदलाव आगया।  पहले का वक़्त देखा जाये तो इंसान खुश रहते थे लेकिन आज सभी एक न खत्म होने वाली एक अनंत दौड़ का हिस्सा मात्र बन कर रह गए है।  तरक्की करना अच्छी बात है लेकिन ऐसी तरक्की किस काम की जो इंसान के अंदर से इंसानियत खत्म कर दे।   पहले नौकरी एक जीवन जीने के लिए महत्वपूर्ण थी लेकिन आज तो कुछ और ही देखने को मिलता है।  इंसान के पास अपनों के साथ वक़्त बिताने तक के लिए वक़्त नहीं है क्यों ? फिर अपने अंतिम समय में उसी इंसान को सब याद आता है की अरे अपने मित्र बंधुवो से तो मिल ही नहीं पाए पूरा जीवन मशीन की तरह काम करने में निकाल दिया और खुद का जीवन जीना ही भूल गए।  दुनिया बड़ी अजीब है एक छोटा सा जीवन मिलता है और उसमे भी हमारा हक़ नहीं होता।   अब लोग आपस में ही प्रतिद्वंदी की भाति व्यवहार करते है और अंतिम छड़ तक उन्हें नहीं पता होता है की प्रतिद्वंदिता थी तो किस चीज की थी।  आज का युग अर्थप्रधान युग है आज के समय ...

उम्मीद

Image
 उम्मीद  उम्मीद, एक ऐसा खतरनाक शब्द जो लगभग सभी के जीवन को प्रभावित करता है।  हम कभी न कभी अपने जीवन के हर एक इंसान से उम्मीद करते है चाहे वो एक छोटी सी चाय पीने की उम्मीद ही क्यों न हो और लगभग हर एक आदमी की उम्मीद टूटती है।  सही माने तो दुसरो से उम्मीद करना ही गलत है।  हमे ये पता है की उम्मीद की है कहीं न कहीं टूटेगी ज़रूर लेकिन फिर भी करते है।  सोंचने की बात ये है की हम अपने से कोई उम्मीद नहीं करते क्युकी अगर टूट गई तो तकलीफ बहुत होगी।  लेकिन हमने कभी ये तो ध्यान ही नहीं दिया की अगर खुद से की गई उम्मीद सफल हो गई तो क्या होगा।   आज के वक़्त जहाँ भी नज़र जाये आप देखो हर जगह उम्मीद है एक माता पिता को अपने बच्चे से उम्मीद है की वो उनके सपने पूरे करेगा, बच्चे को माता पिता से उम्मीद है की वो उसे अच्छे स्कूल में पढ़ाएंगे।  नौकरी करने वाले को अपनी कंपनी से उम्मीद है की वो उसकी सैलरी बढ़ाएंगे कंपनी को अपने कर्मचारी से। लेकिन किसी को खुद से उम्मीद नहीं है।   कोरोना काल में सबने सरकार, पुलिस प्रशासन से उम्मीद की, की वो उनका ध्यान रखेंगे लेकि...

ऐसा क्यों ..

Image
 ऐसा क्यों स्वागत है आप सभी का आज के ब्लॉग में जिसका नाम है ऐसा क्यों।  बिल्कुल सही शीर्षक है आज का, हम हमेशा दुसरो से  पूंछते है ऐसा क्यों आज खुद से ऐसा क्यों पूंछ  कर देखते है शायद हमारे सवालों के जवाब मिल जाए।  हमे अपना देश बाहर के देश जैसा साफ़ सुथरा चाहिए लकिन हम रख नहीं पाते ऐसा क्यों ? दूसरे सरकारी कर्मचारियों को बोलते है की वो रिश्वत ले रहा लकिन खुद के काम के लिए रिश्वत देते है ऐसा क्यों? बच्चो को सिखाते है गाली देना बुरी बात, झूठ बोलना बुरी बात लेकिन वो सारे काम हम करते है ऐसा क्यों? हमारी बहिन बेटियों से कोई बत्तमीज़ी करे तो बर्दाश्त नहीं और वो गलत होता है, लेकिन  अगर वही काम हम करे तो सही ऐसा क्यों?  ऐसे न जाने कितने सवाल है जो हम खुद से कर सकते है लेकिन करते नहीं है क्युकी हिम्मत ही नहीं होती।  क्युकी पता होता है न गलती हमारी होगी और ये तो हम सब को पता है इस दुनिया में किसी को भी अपनी गलती गलती नहीं लगती।  हममें से कोई भी बिलकुल परफेक्ट नहीं होता ये बात भी सबको पता है।  क्या हम सच में अपने आपको एक बेहतर इंसान नहीं बना सकते? हमे...

उड़ान सपनो की

Image
#Dreams   सपने देखना और उन्हें पूरा करना एक बुरी बात नहीं है।  लेकिन सपने देखकर भी पूरा न करना या फिर उन्हें पूरा करने की कोशिश न करना ये गलत है।  हम अपने भविष्य के लिए वर्तमान  को खोते जा रहे है। मै ये नहीं कह रहा की भविष्य की परवाह न करे लकिन ये बात भी आपको माननी चाहिए की हर एक चीज की अपनी अहमियत होती है चाहे वो भविष्य हो या हमारा वर्तमान।  मै ऐसे लोगो से भी मिला हूँ जिनके सपने बड़े है और उन्हें पुरे करने की काबिलियत भी है लेकिन भविष्य के बोझ के नीचे शायद उनके सपने दबे हुए है। इन सबके के पीछे के तीन   कारण लगे मुझे पहला तो समाज और दूसरा उसके घर वाले और तीसरा वो खुद क्युकी वो पहले दो कारणों से जीत नहीं पाया। किसी के भी सपनो में उसके घर वालो का बहुत अहम योगदान होता है इंसान को  बाहर वालो से तो नहीं लेकिन  खुद के घर वालो से बहुत उम्मीद होती है।  ध्यान रखिये कोई भी सपना किसी के दबाव में पूरा नहीं होता।  और ये बात भी सच है की अगर आपका सपना पूरा हो गया एक बार फिर आपसे ज्यादा खुश दुनिया में कोई नहीं है फिर वही बाहर वाले यही बोलेंगे क...

कोरोना

Image
#covid #StayPositive  कोरोना, इस नाम  से तो आज पूरा विश्व परिचित है।  आप जिधर भी देखोगे सोशल मीडिया, टेलीविज़न, न्यूज़ पेपर हर तरफ सिर्फ एक ही नाम है कोरोना।  लेकिन इस कोरोना के बीच एक चीज और सामने आई वो है लोगो का सच।  रोज़ सुनने में आता है की वैक्सीन की कालाबाज़ारी हो रही ऑक्सीज़न की कालाबाज़ारी हो रही।  3200  की रेमडेसिवीर इंजेक्शन 32000 में मिल रहा।  और हमारा बुद्धिजीवी समाज बस एक दुसरो के ऊपर दोषारोपण कर रहा।  ये बोलते हुए भी शर्म आती है की हम उस समाज का हिस्सा है जिसमे लोगो की जान महत्वपूर्ण नहीं है महत्वपूर्ण है तो सिर्फ पैसा है।  दवाइयों की कालाबाज़ारी  अपने चरम में है लकिन उन कालाबाज़ारियों को सिर्फ एक चीज से मतलब है सिर्फ पैसा।   सही माने तो इनसबके ज़िम्मेदार भी हम सब ही है।  कोरोना की फर्स्ट वेव के बाद हमने अपने आप को ढील देदी।  शायद उन कोरोना नियमो को हमने सिर्फ अपने व्यक्तिगत  मनोरंजन के लिए ताक में रख दिया और नतीजा आज सबके सामने है।  हमने अपनी जान से ज्यादा अपने मनोरंजन को जगह दी और आज हालत ये है क...